दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को उन्नाव रेप केस में दोषी पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा पर रोक लगाते हुए उन्हें जमानत दे दी है लेकिन पीड़िता के पिता की न्यायिक हिरासत में मौत के मामले में उन्हें गैर इरादतन हत्या के आरोप में भी 10 साल की सजा के कारण तत्काल रिहाई पर पर अभी भी संशय के बादल मंडरा रहे हैं।
जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की बेंच ने कुलदीप सेंगर को राहत मुख्य मामले (नाबालिग से रेप) में मिली है।
रेप केस में जमानत देते हुए हाईकोर्ट ने सख्त शर्तें भी रखी हैं। सेंगर को 15 लाख रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि की तीन जमानतें देनी होंगी। वह पीड़िता के घर के 5 किलोमीटर के दायरे में नहीं जा सकता। पीड़िता या उसके परिवार को धमकी देने पर जमानत रद्द हो जाएगी।
कुलदीप सेंगर पर अपराधिक मामले –
1. नाबालिग से रेप का मामला,आरोप: 2017 में नाबालिग लड़की के अपहरण और बलात्कार का आरोप,फैसला: दोषी,सजा: दिसंबर 2019 में तीस हजारी कोर्ट ने उम्रकैद (जीवन के अंतिम सांस तक) की सजा सुनाई थी। अब दिल्ली हाईकोर्ट ने सजा सस्पेंड करते हुए जमानत दे दी है।
2. पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत,आरोप: पीड़िता के पिता को झूठे आर्म्स एक्ट में फंसाने और पुलिस हिरासत में उनकी पिटाई/मौत की साजिश रचने का आरोप.फैसला: दोषी,सजा: मार्च 2020 में कोर्ट ने इसे ‘गैर-इरादतन हत्या’ मानते हुए 10 साल की जेल की सजा सुनाई थी। इस मामले में भी सेंगर ने सजा के खिलाफ अपील की है।
3. एक्सीडेंट/हत्या की साजिश का मामला,आरोप: 2019 में पीड़िता, उसकी चाची और वकील जिस कार में जा रहे थे, उसे ट्रक से टक्कर मारने का आरो। इसमें पीड़िता की चाची और मौसी की मौत हो गई थी। आरोप था कि यह हत्या की साजिश थी। फैसला: बरी,वजह: सबूतों के अभाव में कोर्ट ने सेंगर को इस मामले में बरी कर दिया था।
यह मामला साल 2017 का है, जब उन्नाव में एक नाबालिग लड़की ने तत्कालीन भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर बलात्कार का आरोप लगाया था। इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब पीड़िता ने न्याय न मिलने पर सीएम हाउस के बाहर आत्मदाह की कोशिश की। इसके बाद पीड़िता के पिता की पुलिस कस्टडी में मौत और फिर पीड़िता की कार का संदिग्ध एक्सीडेंट होने से पूरे देश में आक्रोश फैल गया था।
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद मामला दिल्ली ट्रांसफर हुआ। साल 2019 में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने कुलदीप सेंगर को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी और 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था।